जन्मदिवस विशेष : चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को "कृष्णगिरी का आम" क्यों कहते थे ?




चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
को कौन नहीं जानता है पर आज उनके जन्मदिवस 10 दिसंबर पर उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें आपको बताना चाहेंगे।  
    
क्या आप जानते है राजगोपालाचारी भारत सरकार के भारत मे अंतिम गवर्नर जनरल थे क्योकि उनके बाद शरत गणतंत्र बन गया था और खास बात ये है कि वह भारतीय मूल के भारत सरकार के लिए पहले गवर्नर जनरल भी थे।


राजगोपालाचारी ने ’स्वातंत्र’ पार्टी कि स्थापना कि और भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार के पहले प्राप्तकर्ताओ मे से एक थे, उनका जन्म वर्ष 1878 मे तमिलनाडु राज्य के कृष्णागिरि जिल्ले के थोरापल्ली गाॅव मे हुआ था इसलिए लोगो ने उनका उपनाम ’कृष्णागिरि का आम’ भी रखा हुआ था, 



भारत के गणतंत्र बनने  के बाद जवाहर लाल नेहरू के आमंत्रण पर 1950 मे वे बिना पोर्टफोलियो के मंत्री के रूप मे केन्द्रीय मंत्री मण्डल मे शामिल हुए और 1950 के अंत मे सरदार पटेल कि मृत्यू  के बाद राजागोपालाचारी गृह मंत्री बने लेकिन 1951 के अंत तक नेहरू और राजगोपालाचारी के परस्पर मतभेद सामने आए जब नेहरू ने हिन्दु महासभा को नवजात गणतंत्र के लिए खतरा माना, जबकि राजगोपालाचारी का मानना था कि कम्युनिस्टो से ज्यादा खतरा है और वे आखिर इस्तीफा दे कर मद्रास लौट गए,





1952 मे वे तमिलनाडु राज्य के दुसरे मुख्यमंत्री बने लेकिन 13 अप्रैल 1954 को खराब स्वास्थ्य के कारण मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दियाए मुख्यमंत्री पद से उनके इस्ताफे के बाद वे साहित्य गतिविधियो मे अपना समय देने लगे और उन्होने संस्कृत महाकाव्य ’रामायण’ का तमिल री-टेलींग लिखा जिसको 23 मई 1954 से 6 नवम्बर 1955 तक तमिल पत्रिका कल्कि मे एक सिरियल रूप मे दिखाया गया। 
 

 



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